Saturday, September 6, 2014

गँजाई

(1) बाल झड़ने की शुरुवात :
मै और मेरे गिरते हुए बाल अक्सर ये बातें करते है; 
अगर तुम सिर पर होते तो कैसा होताऐसा होतावैसा होता।
तुम मेरे सर चढ़ के नाचते और मै अपने पंजो पर नाचता।
मै तुम्हे प्यार से सहलातातेल मालिश करता और तुम दिन दूनी रात चौगुनी गति से बढ़ते।
हवा चलती, तुम इठलाते बलखाते, और मेरे पैर जमीन पर  पड़ते।
हाय तुम मुझे यूँ गंजा छोड़ कहाँ चल दियें। 
मै और मेरे गिरते हुए बाल.……………

(2) बेतहाशा बाल झड़ना :
अब मुझे रात दिन बालो का ही ख़्याल है;  क्या कहूं गंजे सर का क्या हाल है;
इस गंजे को ये मलाल है, कि तुम्हारे सर पे बाल है।अब मुझे रात दिन............

बालो को बढ़ता देखे बिना चैन मिलता नहींतेल मालिश भी तो कोई अब चलता नहीं;
जादू
 हैं कैसाकी तेरा कोई बाल झड़ता नहीं उजड़ गया हूँइस गँजाई में | अब मुझे रात दिन .....

हद से बढ़ने लगा मेरा गंजापन; विग को लगा लूं ,के टोपी के निचे छुपा लूं;
या फिर हेयर ट्रांसप्लांट करा लूंक्या कहूं गंजे सर का क्या हाल है | अब मुझे रात दिन बालो का ही ख़्याल है। 

(3) लगभग पूरा गंजापन :
गँजाईगँजाईगँजाई ;  टेनशन का साथ क्या खूब निभाई।
जब से टकली देने लगी है दिखाई,  तेल मालिश भी कोई काम  आई। गँजाई ,गँजाई ,गँजाई।

आज नए इम्पोर्टेड तेल की शीशी है मंगाई ; कल ही नीम हकीमो ने थी बताई |
अब तक जो भी दवा है लगाईं ; उसने मेरी दुर्गती ही बनाई।
डूबी मेरी पाई पाईलूट ले गई गाढ़ी कमाई;  गँजाईगँजाईगँजाई 

(4) पूर्णतया बाल रहित :
गँजाई गँजाईटकली पे फैली हुई हैं गँजाई।
मैने जो किया कंडीशनर अप्लाई,  तो बालो की जड़े ही हाथो में आई। 
बालो के वास्ते टेबलेट्स मैंने कैसी कैसी खाई;  पर टूटे बाल सारेमायूसी है छाई। 
हर दवा, फ़ैल हुईजिंदगी उखड गई;  गँजाईगँजाई.....
क्या मैंने चाह था, और क्यों किस्मत मैं आई,  गँजाईगँजाईटकली पे फैली हुई हैं गँजाई। 

(5) हालातो से  समझौता 
बालो का टूटनाझड़ना और उखड़नाकोई मरहम ना इन्हे रोके।
मरहम मल्टीनेशनल कंपनीज़ के लिए हैमैंने कुछ ना पाया इन्हे अप्लाई करके।

Saturday, March 16, 2013

मोहाली मैच १६ मार्च २०१३


ईटली की तितली

ओ मंचिनीs, कहाँ उड़ चली,  झूठे डॉक्योंमेंटस पे मोहर लगा के कहाँ उड़ चली | ओ मंचिनीs

Wednesday, October 10, 2012

असुरदास पार्ट II

बहुत दिनों तक छाती पीटी, बहुत दिनों तक रह लिए उदास;
तोड़ के अपनी ग़म  की समाधी, लौट आये नीलम असुरदास।

चाहते न चाहते जीवन एक नई  करवट ले रहा है, हर चोट जीवन की दिशा धारा नहीं बदल सकती लेकिन जीवन का झरना बड़ी बाधाओ के आने पर , अपने नए रस्ते खुद बखुद बना लेता है, मेरा जीवन भी बदलता रह हैं और शायद आगे भी रहेगा, और अब मै  खुद को कविताओ के अधिक और अधिक  निकट पा रहा हूँ , शायद इस ब्लॉग पर मेरी लेखनी अब कम  चलेगी, क्योकि अब में अपने कविताओ और हास्य कविताओ के लिए बनाये गए ब्लॉग "फिश मार खां"(fish-mar-khan.blogspot.in) पर अधिक सक्रिय रहूँगा।
इस ब्लॉग पर भी कभी कभी कुछ पोस्ट डालने के प्रयास किया करूँगा, मेरी कई रचनाये इस ब्लॉग पर अधूरी ही पड़ी है, और वक्त आने पर उन्हें एडिट कर पोस्ट तो करूँगा ही, लेकिन इस समय विदाइ लेनी  ही होंगी ।

Sunday, September 16, 2012

विषेले स्वप्न,अँधेरी दुनिया


जब मनमित ना मिले, यूँ लगा की अरमानों के पंख जले;
जीवन तो जलाया था पहले, पर यूँ लगा की उजालो से मेरे प्राण जले|
संगीत तो कभी था ही नहीं, पर यूँ लगा की थम गई स्वर ध्वनि;
ह्रदय में न थी कोई कमजोरी, पर यूँ लगा की स्वच्छंद हुई हृदयगति|

Friday, June 29, 2012

मोम की व्यथा

मोम था मै, पर दुनिया ने सदा से मुझे पत्थर समझा,
पहले चोट पर चोट देकर मेरा बदन तराशा,
फिर जब बरसो तक जलकर मैंने नया जीवन पाया,
कोई संगदिल मुझे जूतों तले दबाकर ले गया,
और फिर से चोट खाने के लिए बिच सड़क पर छोड़ गया,
स्फटिक हिम सा श्वेत था मै, पर अब एक अपशिष्ट विकृति हूँ मै,
चाहे दुनिया मुझे पत्थर समझे, पर मोम था मै, मोम हूँ मै|
मुझ पर चोट करने वाले एक दिन थक जायेंगे,
पर हम नये सांचे में ढलकर नए रूप में फिर आयेंगे,
तब शायद दुनियां ये समझे, मोम था मैं, मोम हूँ मैं|

Thursday, May 10, 2012

विवाह क्यों?


जीवन  की सभी राहे अंत में ईश्वर या खुदा पर ही समाप्त होती है, लेकिन विवाह जीवन का एक ऐसा मोड लगता है जिसका आध्यात्मिक विकास से कोई लेना देना न हो| पर जाने क्यों अंदर से ऐसा भी  लगता रहता है की ये विकास का ही एक पड़ाव है, इसी तथ्य का विवेचन मेने इस पोस्ट में करने का प्रयास किया है| 
गौर से देखा जाय तो, कोई मूर्ति पर ध्यान लगाता है, कोई जीवन साथी पर, कोई ज्ञान पर, अंत में जब ध्यान की गहराई में मन शांत हो जाता है तो आत्मा की आवाज सुनाई देती है, और वही ईश्वर तक ले जाती है| लेकिन ध्यान लगाने के लिए जीवन साथी ही क्यों? कोई घनिष्ट मित्र क्यों नहीं?  
जीवन में जीवन साथी का वही भाग होता है जो एक ऐसे सच्चे दोस्त की तरह है जो तुम्हारे हमेशा साथ रहता हो, और जो तुम्हारी अंतरात्मा को साफ़ रख सकता हो| जीवन में  निरंतर ऐसी घटनाये होती ही रहती है जिनके चलते हमारी अंतरात्मा पर धुल/कालिख जमने लगती है, साथ ही हम अपनी ही आत्मा की आवाज़ को अनसुना  कर धीरे-२ स्वयं तो अंदर से बहरे हो जाते है और अंतरात्मा को गूंगा बना देते है| यदि हम स्वयं अंदर झाँकना बंद कर दे तो बड़े से बड़ा गुरु भी हमें ईश्वर तक नहीं पहुचा सकता| ऐसे में हमें ऐसा दोस्त चाहियें जो हमें इतना नज़दीक से जानता हो की वो हमारे अंदर झांक सकता हो , और ये काम एक जीवनसाथी के अलावा कोई नहीं कर सकता|
 दोस्त जो तुम्हारे साथ नहीं रहते धीरे-२ नए परिवेश में ढल जाते है, और परस्पर समझ धीरे-२ कम हो जाती है, परन्तु चाहे संतति के हित के लिए ही सही, विवाह के बाद साथ रहना ज़रुरी हो जाता हैं| संतान का जन्म एक प्रकृति प्रदत्त मुश्किल की घड़ी है जो शायद इसलिए बनाई ही गई है की आप एक दूसरे के बेहद करीब आ सके| साथ बिताए सुख के पल तो कुछ समय के बाद धुँधले पड़ जाते है लेकिन मुश्किल समय में दिया हुआ साथ आपको गहराई से जोड़ देता है| 
वही दूसरी तरफ से देखा जाय तो संतान  का जन्म स्वयं अपने आप में एक आध्यात्मिक घटना है, चाहे संतान का माता पिता की और प्रेम हो या माता पिता के  संतान के प्रति प्रेम और करुणा के भाव हो, ये प्रेम भाव भी तो मन/आत्मा के मेल को धोने की एक श्रेष्ठ औषधियाँ ही है| आप ईश्वर की सभी संतानों में अपनी संतान की छवि देख कर अपने समस्त बंधनों से मुक्त हो सकते है, या संसार के अन्य लोगो को माता पिता की भाँती आदर देकर परमपिता परमेश्वर को साक्षात महसूस कर सकते है| भक्ति ईश्वर को पुत्र/पुत्री , माता/पिता, या सखा/सहेली  देखकर की जा सकती है| और फिर यह सच ही है, आत्मा के रूप में ना तो इस संसार में आप ईश्वर के बाद आये है न उसके पहले, अत: यह तो आप पर निर्भर है की आप किस पर ध्यान लगाना अधिक स्वाभाविक और सहज मानते है|
कई बातें हम सब जानते है/समझते है, परन्तु उनका हमें कोई प्रत्यक्ष अनुभव नहीं होता, यहाँ ये भी ध्यान देने योग्य है की अंतरात्मा के पास हर सवाल का जवाब है, फिर भी हम बार बार जन्म लेते है, क्योंकि जिसे सिर्फ जानते है, अनुभव नहीं कर पाते वो कागजी ज्ञान तो समय की धारा में बह जाता है| विवाह की पौधशाला हमें जीवन के अनुभव देने के लिए है, निश्छल प्रेम में डूबे, साफ़ अंतर्मन में बोलते ईश्वर की आवाज़ सुनाने के लिए है|