Monday, January 2, 2012

Mercy के मालिक श्रीयुत निलम असुरदास के दोहे


निलम गावत देखके मेलोडीज करी पुकार;
बहुत हो गया तोहरा बेसुरा आयटम सोंग, कब आएगी हमारी बार |



निलम कनक ते सौ गुनी मादकता अधिकाय
या खावै अकेला बोराय, वा गावै सैकड़ो बोराय |


निलम-नीलाम गुलाम ते दो कौड़ी भी अधिक नाय;
या रोवै भीख में लोग माल दई जाय;  वा गावै माल छोड़ी के लोग भागी जाय |

Sunday, December 18, 2011

deja vu

ये कौन सा मोड़ है रिसर्च कैरिएर का; मख्खी, अंडे और ढेर सारी मछलियाँ;
सबमे बनाने है मुझे निओपिलासिया; पर पहले जैसी स्कील्स अब मेरी है कहाँ;
कैंसर जेनेटिक्स अब मुझे लगता है जैसे पहेलियाँ; फिश कट जाती है, पर कैसे मुझसे कटेगी ये मख्खियाँ,
किस्से कहू में ये सारी बतियाँ, ये कौन सा मोड़ है रिसर्च कैरिएर का..................

Thursday, October 6, 2011

डॉगविजय एंड कंपनी एड

पहले देखियें फिर गुनगुनाइए

ऊँची अपनी टांग है, करनी बात उटपटांग है,   ब्लेडर में अटकी जान है.
यहाँ पिलर  है बनानी, मिलता इससे सुकून है रूहानी !

(रचना इस वर्ष के Ig Nobel से प्रभावित है )

Wednesday, September 28, 2011

समानता-विडम्बना

क्या कभी आपने सोचा है की पाकिस्तानी क्रिकेटरों और हिन्दुस्तानी नेताओ के बिच, क्या समानता है? दोनों जगह भुतपूर्व क्रिकेटर नेता बन जाते है लेकिन यहाँ हम उनकी बात नहीं कर रहे है, बल्कि क्रिकेटरों से प्रेरित राजनीती की बात कर रहे है,
बयान:
(१)  मैं सभी तरह के क्रिकेट से संन्यास लेता हूँ

कुछ महीने बाद: मेने काफी सोच विचार किया और मेरे टीम के सदस्यों की सलाह से इस नतीजे पर पहुचा की मुझमे अभी बहुत क्रिकेट बाकी है और मैं अन्तर्राष्ट्रीय क्रिकेट टीम में चयन के लिए उपलब्ध हूँ
(१’) मैंने अन्तरात्मा की आवाज पे पार्टी/पद से इस्तीफा दे दिया है

कुछ महीने बाद: जनता और मित्रों के अनुरोध पर मैं देश हित में अपना इस्तीफा वापिस लेता हूँ

आरोप:
(२) बाल टेम्परिंग:

बेशर्मी: इस तरह से गेंद के साथ हुई छेड़छाड़ को कानून बनाकर वैध बनाया जाय, इससे क्रिकेट का विकास होंगा. पूरी गेंद के साथ खेलने से क्रिकेट बोरिंग/नीरस हो जाएगा  

(२’) बिल टेम्परिंग:

बेशर्मी: इस बिल को जल्द से जल्द कानून बनाया जाय, हमने बिल में आवश्यक परिवर्तन कर लोकतंत्र को मजबूत बनाया है. पूर्ण बिल को स्वीकार करने से सविधान का अपमान होंगा.
रिश्वतखोरी
(३) नो बाल के लिए डॉलर्स: कौन सी बाल कैसी डालना है यह सब आपके पैसो पर निर्भर करेगा
(३’) नो कॉन्फिडेंस मोशन के लिए डॉलर्स: कौन से प्रस्ताव पर कैसे मत देना है ये आपके पैसो पर निर्भर करेगा.

निष्कर्ष: मलिक, सामी, आसिफ, आमेर, अख्तर, आफरीदी आदि पाक खिलाडियों को भारत रत्न दिया जाए इन्होने भारतीय लोकतंत्र की बड़ी सेवा की है.

Friday, September 23, 2011

समसामयिक

ND तीवारी की कोर्ट ने अच्छी खिचाई की, पर मुझे लगता है की अगर उनका ब्लड सेम्पल मिल जाता तो कई कोठे पर बैठी तवायफ़ों के बच्चो को बाप मिल जाता. आखिर ये अनैतिक व्यक्ति आंध्र राजभवन में ३ तिन कॉलगर्ल्स के साथ पाया गया था, अगर ८५ साल की उम्र में इनका यह हाल था तो उत्ताराखंड के मुख्यमंत्री रहतें हुए तो उन्होंने गजब ढाया होंगा, बस एक बार के ब्लड सेम्पल से ही हजारों टेस्ट लग सकते थे.
 सावन के अंधे, जिन्हें सब हरा ही हरा नजर आता है
India busy on Idea 3G , so no आबादी; government busy on camouflaging 2G , so no गरीबी.
हा हा अब तो मेरा हिन्दुस्तान प्रगति पथ पर है.
विजन २०२०:
२००५ :जो दो वक्त का खाना न खा सके वो गरीब
२०११: जो एक वक्त का खाना खा सके वो गरीब नहीं,
२०१२:जो किसी सरकार विरोधी आन्दोलन में हिस्सा ले वो गरीब नहीं
अन्ना के आन्दोलन का खर्चा सरकार ने तो उठाया नहीं, वो तो आन्दोलन करने वालो ने खुद उठाया. अब जिनके पास इस तरह के आन्दोलन में खर्च करने को पैसा है वोह गरीब कैसे हो सकते है?
२०१५ :जिसके पास हो बैंक में खाता वोह गरीब नहीं,
सरकार छात्रो के जीरो बलेंस खाते खुला रही है, गणवेश की  सब्सिडी देने के नाम पर, कल कहेगी सब्सिडी दी पढाई हो गई अब कैसी गरीबी? खाता है, मतलब जरुरत से ज्यादा पैसे है, तो फिर गरीब कैसे?
२०२०:  जो दिन में एक बार मोबाइल फोन से बात करे वो गरीब नहीं कहलायेगा.
 मोबाइल टैरिफ वार में एक दिन सब के पास मोबाइल पहुच जाएगा और फिर दिन के एक कॉल का खर्चा सरकार सब्सिडी के रूप में देंगी, और एक कॉल मोबाइल कंपनी फ्री देंगी. सरकार  कहेगी की जो इन दोनों काल्स का उपयोग  करेगा उसे गरीब नहीं माना जाएगा! क्योंकि गरीब होगा तो उसके पास बात करने की फुर्सत कहाँ से आई?

यह है सरकार का विजन २०२०. २०२० में गरीबी एकदम ख़तम.

शोएब हेस गोट टेलेंट !

सचिन मेरे से डरता है, मै भुत की पिक्चर देखा वोह मेरे सपने में आया मैंने उसे बोतल में बंद कर दिया, मै डीसकवेरी चेनल पे शेर देखा वोह मेरे सपने में आया मै  उसका सब दांत तोड़ डाला.  एक बार मै खली का खेल देखा, और उस रात मैंने उसको उसको इतना पिटा की तब से आज तक सपने में दुबारा नहीं आया.
पन जब मै TV पे  सचिन को साउथ अफ्रीका के सामने डबल सेंचुरी मारते देखा तो वो रात को मेरे सपने में आयेच नई.
क्या गुरु क्या बोलता है, वोह साला अपुन से डरता है, इसीलिए अपने सपने में आताइच नई!

Thursday, September 22, 2011

चिदम्बरम-दिगंबरम

काम से है वे राष्ट्रपत्नी, समय समय पर सम्हालते है वे गृह एवं वित्त,
पर दिखने में है वे श्वेताम्बर,
उनकी आड़ लेकर बच निकलते मनमोहन, ये कथा है बड़ी विचित्र,
 मन (चित्त) के असली अम्बर है वे, कितना सार्थक है उनका नाम चिदम्बर,
 खिच चुकी  जिनकी कोर्ट में खाल, अब जब ख़त्म  हुए सीबीआई के भी सारे शस्त्र,
क्या उन्हें गद्दी से उतार कर,  मनमोहन बनेगे अब सिकंदर?
वानप्रस्थ की आयु है मनमोहन, छोड़ दो ये सारे मैले वस्त्र,
बन जाओ अब श्वेताम्बर या पीताम्बर,
धमाको के लिए गृह मंत्री, महंगाई के लिए वित्त मंत्री, भष्टाचार के लिए बाकि सारे मंत्री,
अगर यही है तुम्हारा मन्त्र, 
तो ऐसा न हो की तुम ओड़े रहो चिदम्बर और  देश की जनता नंगा कर बना दे तुम्हे दिगंबर.