Friday, September 2, 2011

यह देश है....

यह देश है वीर अन्नाओ का, अनपढ़ नेताओ का, गवार और नालायक सांसदों का.
 इन सांसदों का यारो क्या कहना, ये लगाते देश को लाखो करोडो का चूना.
बड़ी मोटी चमड़ी है इन सालो की, बड़े तीखे हैं दात चारा खाने वालो के. 
यहाँ बैठते है रावण संसद में.
ये सुनले है हमें तमन्ना मर मिटने की, कसम हमें तिरंगे की.
वक्त है आओ मिलकर इंकलाबी नारा बुलंद कर दे.
भारत माँ की छाती छलनी होती इन चोरो से, छाती पर लोटते सांपो से.
आओ दिलादे मुक्ति देश को इन गद्दारों से.

1 comment:

  1. भाई साहब !बात आपने सही कही है लेकिन जरा -ज़बान संभाल ,के कहिये सलीके से निचोड़ के लगाइए ....
    जन आक्रोश आर हर शू मुखरित है .शुक्रवार, २ सितम्बर २०११
    शरद यादव ने जो कहा है वह विशेषाधिकार हनन नहीं है ?
    "उम्र अब्दुल्ला उवाच :"

    ReplyDelete